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लकवा का रोगी के नज करनों
(मत्ती ९.१-८; लूका ५.१७-२६)
1 नरा दन बाद जदे ईसु पाछो कफरनहूम नगर आयो तो सुण्यो के उ घर माय हे। 2 अने नरा लोगहुंण भेळा हुई ग्या यां तक के कमांड़ का बायरे तक बी जगा नी थी, अने उ उणके परबचन सुणई र्‌यो थो। 3 तो लोग लकवा का एक बेमार के चार मनखहुंण से उठाड़ी के उका कने ल्याया। 4 पण जदे भीड़ की वजासे उका कने जई नी सक्या, तो वी घर पे फेर्‌या खापराहुंण के जां ईसु थो हटाड़वा लाग्या; अने जदे उणने हटाड़ी के जगा बणई ली, तो उनी खाट के जेका पे लकवा को बेमार पड़्यो थो, निच्चे उतारी। 5 अने ईसु ने उणको बिसास देखी के उना लकवा का बेमार से क्यो, "हे बेटा, थारा पाप मांफ हुई ग्या।"
6 वां की जागे थोड़ाक सासतरी बेठ्या अपणा हिरदा माय तरक-बितरक करी र्‌या था। 7 "यो मनख असो कायसरु बोले? यो तो परमेसर की बुरई करी र्‌यो; परमेसर का अलावा हजु कुंण पाप मांफ करी सके हे?"
8 ईसु ने झट अपणा आतमा माय यो जाणी के, के वी अपणा हिरदाहुंण माय असतरा तरक-बितरक करी र्‌या, उणकासे क्यो, "तम कायसरु अपणा हिरदाहुंण माय इनी बातहुंण का बारामें तरक-बितरक करी र्‌या हो? 9 सरल कंई हे, इना लकवा का बेमार से यो केणो के, 'थारा पाप मांफ होया' या यो के, उठ्या, अने अपणी खाट उठाड़ी के चल'? 10 पण इकासरु के तम जाणो के हूं मनख का बेटाa के इनी धरती पे पाप मांफ करवा को हक हे, "उने लकवा का मार्‌या से क्यो, 11 "हूं थार से कूं, 'उठ्या' अपणी खाट उठाड़ अने घरे चल्यो जा'।"
12 उ उठ्यो अने झट अपणी खाट उठाड़ी के सगळा लोगहुंण का देखता होया बायरे चल्यो ग्यो; अने वी सगळा दंग रई ग्या अने परमेसर की म्हेमा करता होया केवा लाग्या, "असो तो हमने कदी नी देख्यो।"
लेवी के तेड़णो
(मत्ती ९.९-१३; लूका ५.२७-३२)
13 उ पाछो बायरे हिटी के सरवर कराड़े ग्यो, अने बड़ीमेक भीड़ उका कने अइरी थी, अने उ उणके परबचन देतो थो। 14 जाता बखत उने हलफ‍ई का बेटा लेवी के चुंगी-चोकी माय बेठ्यो देख्यो, अने उने उकासे क्यो, "म्हारा पाछे हुई जा।" उ उठ्यो अने ईसु का पाछे चली पड़्यो।
15 फेर असो होयो के जदे उ लेवी का घरेb जिमी र्‌यो थो तो नरा चुंगी वसुळवा वाळा अने पापी बी, ईसु अने उका चेलाहुंण का गेले जिमी र्‌या था; क्योंके वी नरा था अने उका पाछे चली पड़्या था। 16 जदे फरीसिहुंणc माय से थोड़ाक सासतरिहुंणd ने देख्यो के उ पापिहुंण अने चुंगी लेवा वाळा का गेले जिमी र्‌यो तो उका चेलाहुंण से केवा लाग्या, "ईसु चुंगी लेवा वाळा अने पापिहुंण का गेले कायसरु खाय-प्ये?"
17 यो सुणी के ईसु ने उणकासे क्यो, "अच्छा-भला के बेद की जरुवत हयनी, पण बेमारहुंण के हे। हूं धरमिहुंण के नी, पण पापिहुंण के तेड़वा आयो हूं।"
ईसु से बरत का बारामें सवाल
(मत्ती ९.१४-१७; लूका ५.३३-३९)
18 योहन का चेलाहुंण अने फरीसी बरत राख्या करता था; अने वी अई के ईसु से केवा लाग्या, योहन का चेलाहुंण अने फरीसिहुंण का चेलाहुंण तो बरत राखे, पण थारा चेलाहुंण कायसरु बरत नी राखे?"
19 ईसु ने उणकासे क्यो, "जदत्तक लाड़ो बरात्याहुंण का गेले रे, तो कंई बरात्या बरत राखे? जदत्तक लाड़ो उणका गेले रे वी बरत नी राखी सके। 20 पण वी दन आयगा जदे लाड़ो उणकासे इकाड़ी कर्‌यो जायगा अने जदे वी उना दन बरत राखेगा।
21 नवा लतरा को थेगळो जूना लतरा पे कईं को नी लगाड़े; नी तो थेगळो उका माय से खेंची लेगा याने नवो जूना माय से अने उ पेलां से बी बत्ती फाटी जायगा। 22 नवा अंगूर रस के जूनी मसखहुंण माय कईं को नी भरे, नी तो अंगूर रस मसखहुंण फाड़ी लाखेगा अने अंगूर रस अने मसखहुंण दोइज नास हुई जायगा; पण नवो अंगूर रस नवी मसखहुंण माय भर्‌यो जाय हे।"
सबत् अने मनख
(मत्ती १२.१-८; लूका ६.१-५)
23 e असो होयो के उ सबत् का दन खेतहुंण माय से हुई के जई र्‌यो थो, अने उका चेलाहुंण चलता-चलता; उम्बी तोड़वा लाग्या। 24 अने फरीसिहुंण उकासे केवा लाग्या, देख, "ई असो काम कायसरु करे जो सबत् का दनf करनों अच्छो हयनी?"
25 h तो उने उणकासे क्यो, "कंई तमने कदी असो नी बांच्यो के जदे दाऊद राजाg अने उका सातिहुंण के भूक लागी अने उके जरुवत हुई तो दाऊद ने कंई कर्‌यो? 26 j उने कसे अबियातार म्हापुरोहितi का बखत माय, परमेसर का मन्‍दर माय जई के चड़ावा का रोटा खाया जिणके खाणो पुरोहित का अलावा कइंका के ठीक नी थो, अने उने अपणा सातिहुंण के बी दई द्‍या?"
27 फेर उने उणकासे क्यो, "सबत् को दन मनख सरु बणायो, नी के मनख सबत् सरु। 28 इकासरु हूं मनख को बेटो सबत् को बी मालेख हूं।"